Author Topic: अलबिदा जगजीत सिंह  (Read 566 times)

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Offline स्पाईनी

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अलबिदा जगजीत सिंह
« on: October 11, 2011, 11:21:04 PM »
"जान बांकी है मगर सास रुकी हो जैसे"
उनकै एउटा गजलमा भनिएको माथिको हरफजस्तो अवस्थामा केही समय बिताएर गजल सम्राट जगजीत सिंह यो संसारबाट बिदा भए। उनी अस्ताएपनि उनका अमर गजल अनी गीतहरुमार्फत जगजीत सिंह सांगीतिक आकाशमा चम्किरहनेछन्।
"होटोंसे छुलो तुम मेरा गीत अमर करदो" 

कहीँ दूर जब दिन ढल जाये
सांझ कि दुल्हन बदन चुराये
चुपके से आए
मेरे खयालों के आँगन में
कोइ सपनों के दीप जलाये
दीप जलाये
कहीं दूर....

कभी युं हि जब हुइ बोझल सासें
भर आइ बैठे बैठे जब युं हि आंखें   
कभी मचलके, प्यार से चलके
छुये कोइ मुझे पर नजर नआए
नजर नआए 
कहीं दूर....

दिल जाने मेरे सारे भेद ये गहरे
हो गए कैसे मेरे सपने सुनहरे
ये मेरे सपने, येहि तो है अपने
मुझसे जुदा न होंगे यिनके ये साय
यिनके ये साय
कहीं दूर....
« Last Edit: October 12, 2011, 03:16:41 AM by स्पाईनी »
असम्भब छ जिन्दगी, जिउने कुनै रहर देउ
मृत्यु बरु सहिदिन्छु, अञ्जुलीमा जहर देउ ।

Offline स्पाईनी

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« Last Edit: October 11, 2011, 11:34:01 PM by स्पाईनी »
असम्भब छ जिन्दगी, जिउने कुनै रहर देउ
मृत्यु बरु सहिदिन्छु, अञ्जुलीमा जहर देउ ।

Offline काली

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Re: अलबिदा जगजीत सिंह
« Reply #2 on: October 12, 2011, 01:48:49 AM »
कहीँ दूर जब दिन ढल जाये
सांझ कि दुल्हन बदन चुराये
चुपके से आए
मेरे खयालों के आँगन में
कोइ सपनों के दीप जलाये
दीप जलाये
कहीं दूर.... अलबिदा जगजीत सिंह  !!!

 


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